₹2,799 ऑनलाइन मंगाए, खून निकालने और 5 दिन मजदूरी कराने के आरोप से मचा हड़कंप
लखनऊ। राजधानी लखनऊ से सामने आया यह मामला अगर जांच में सही पाया जाता है, तो सवाल सिर्फ एक युवक के साथ कथित ज्यादती का नहीं, बल्कि रिकवरी के नाम पर कानून को हाथ में लेने वालों पर कार्रवाई का भी है।
मामला निगोहां क्षेत्र के राजाराम खेड़ा पुरहिया का बताया जा रहा है। पीड़ित के मुताबिक उसने किस्तों पर मोबाइल फोन लिया था और वह अपनी किस्तें समय से चुका रहा था। इसके बावजूद कथित रिकवरी एजेंट उसे उसके घर से अपने साथ ले गए और बहाने से लखनऊ लेकर पहुंचे।
आरोप है कि इसके बाद युवक को किस्त नहीं भरने की बात कहकर बंधक बना लिया गया। मामला यहीं नहीं रुका। पीड़ित के अनुसार उसका एक यूनिट खून निकाला गया और उसके बड़े भाई को फोन करके ₹2,799 ऑनलाइन मंगवाए गए।
अब सवाल यह है कि अगर युवक की किस्त बकाया थी भी, तो क्या रिकवरी की नई व्यवस्था में खून निकालना, बंधक बनाना और पैसे वसूलना भी शामिल हो गया है?
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि उसे करीब पांच दिन तक बंधक रखकर मजदूरी कराई गई। यानी मोबाइल किस्त पर लिया था, लेकिन कथित रिकवरी की कीमत मानो आजादी से चुकानी पड़ी!
सबसे गंभीर सवाल इसके बाद उठता है।
कथित चंगुल से निकलने के बाद युवक जब थाने पहुंचा तो आरोप है कि पुलिस ने उसकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करने के बजाय उसे वहां से भगा दिया। आखिर पीड़ित अगर थाने में अपनी फरियाद लेकर पहुंचे और उसे ही लौटा दिया जाए, तो वह जाए तो जाए कहां?
मामले में DCP South के हस्तक्षेप के बाद मुकदमा दर्ज होने की बात सामने आई है। अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि युवक को किसने ले जाया, उसे कितने समय तक रोका गया, पैसे किस खाते में मंगाए गए और खून निकालने तथा मजदूरी कराने के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
फिलहाल इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। क्योंकि कर्ज की वसूली का अधिकार किसी को भी कानून से ऊपर होने का अधिकार नहीं देता।
अगर आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ रिकवरी नहीं…
रिकवरी के नाम पर कथित गुंडागर्दी का ऐसा मॉडल है, जिस पर कार्रवाई का हिसाब जनता जरूर पूछेगी।











