Home / राजनीति / बारिश में डूबे घर, आंसुओं में डूबे परिवार; 15वें दिन भी गहरे पानी में जारी रहा चिता आंदोलन रेड अलर्ट और मूसलाधार बारिश के बीच आंदोलनकारियों ने किया सत्याग्रह, प्रभावितों ने पूर्ण मुआवजा और पुनर्वास की मांग उठाई

बारिश में डूबे घर, आंसुओं में डूबे परिवार; 15वें दिन भी गहरे पानी में जारी रहा चिता आंदोलन रेड अलर्ट और मूसलाधार बारिश के बीच आंदोलनकारियों ने किया सत्याग्रह, प्रभावितों ने पूर्ण मुआवजा और पुनर्वास की मांग उठाई

पन्ना/अजयगढ़। मझगाय बांध प्रभावितों का चिता आंदोलन शनिवार को 15वें दिन भी जारी रहा। रेड अलर्ट और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच आंदोलन स्थल की झोपड़ियां और अस्थायी व्यवस्थाएं पानी में डूब गईं। प्रभावित गांवों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कई घरों में दो से तीन फीट तक पानी भरने से अनाज, कपड़े और गृहस्थी का सामान खराब होने की बात सामने आई है।मड़लिया, टपरियां, कुंवरपुर, बहनरी, जुड़र, सर्रा और करिया खेत सहित प्रभावित गांवों में बारिश से हालात बिगड़ने का दावा आंदोलनकारियों ने किया है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि जिन्हें पहले ही पूरा मुआवजा नहीं मिला, अब उनकी बची-खुची गृहस्थी भी बारिश और जलभराव की चपेट में आ गई है। महिलाओं के रोने-बिलखने के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई हैं।गहरे पानी में जारी रहा सत्याग्रहलगातार 15 दिनों से चिता, जल, मिट्टी, फांसी, सूली और बेड़ी सत्याग्रह के अलग-अलग रूपों के जरिए विरोध किया जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि लगातार बारिश और पानी में रहने से कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ रही है। सर्दी-खांसी, पैरों में घाव और त्वचा संबंधी परेशानियां होने की बात भी कही गई है।आठ साल बाद भी मुआवजे को लेकर सवालजय किसान संगठन के बैनर तले अमित भटनागर के नेतृत्व में चल रहे आंदोलनकारियों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण की धारा 11 की अधिसूचना जारी हुए आठ साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कई पात्र परिवार अब भी मुआवजे और पुनर्वास से वंचित हैं। आंदोलनकारियों के अनुसार कुछ परिवारों को पांच लाख रुपये मिले हैं, जबकि कई परिवारों को राशि नहीं मिली। प्रभावितों का कहना है कि घोषित पैकेज 12.5 लाख रुपये का है। मकान, कुएं, पेड़ और अन्य परिसंपत्तियों के मुआवजे को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।आंदोलनकारियों ने भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 38 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि कब्जा लेने और विस्थापन से पहले मुआवजे तथा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। उनका कहना है कि मौजूदा जलभराव की स्थिति ने कानून के पालन को लेकर सवाल खड़े किए हैं।“विकास के विरोधी नहीं, अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं”अमित भटनागर ने कहा, “हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर आदिवासियों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं कर सकते। जब कानून मुआवजे और पुनर्वास को सुनिश्चित करने की बात करता है, तो फिर लोगों के घर डूबने से पहले उनका हक क्यों नहीं दिया गया?”उन्होंने प्रशासन से प्रभावित परिवारों के नुकसान का तत्काल आकलन कराने, पूर्ण मुआवजा देने, उचित पुनर्वास और राहत की व्यवस्था करने की मांग की।आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल जलभराव और मकानों के नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है।

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