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41 दिन से #चिता आंदोलन, 26वें दिन भी अमित भटनागर का आमरण अनशन जारी

24 अक्टूबर को पन्ना में उमड़ेगी जन आवाज नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार सहित आदिवासी नेताओं का पन्ना आगमन तय; जय किसान संगठन निकालेगा ‘संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ रैली’अमित भटनागर का 8 किलो वजन घटने की जानकारी, महिलाओं ने कई दिनों से बंद रखे चूल्हे; आदिवासी-किसानों के अधिकारों और दिव्या अहिरवार की रिहाई का मुद्दा भी उठेगा पन्ना, 22 अक्टूबर 2026।पन्ना जिले में आदिवासी-किसानों के अधिकारों, विस्थापन, कथित फर्जी मुकदमों और प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ जारी चिता आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। आंदोलन के 41वें दिन और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के आमरण अनशन के 26वें दिन भी समस्याओं के समाधान को लेकर आंदोलनकारियों की प्रतीक्षा जारी है।लगातार अनशन के कारण अमित भटनागर का वजन लगभग 8 किलो कम हो चुका है और उनका स्वास्थ्य तेजी से गिर रहा है।इसी बीच 24 अक्टूबर को जय किसान संगठन के नेतृत्व में ‘संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ रैली’ निकाली जाएगी। रैली का संयोजन आदिवासी दलित क्रांति सेना (बुंदेलखंड) करेगी।रैली में प्रदेश के वरिष्ठ आदिवासी नेताओं, किसान संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न जन आंदोलनों से जुड़े लोगों की भागीदारी होगी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से भी 24 अक्टूबर को पन्ना पहुंचने और सत्याग्रहियों एवं प्रभावित विस्थापितों से मुलाकात करने की आधिकारिक घोषणा की गई है। इसी के साथ डॉ. विक्रांत भूरिया, विधायक झाबुआ एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस, श्रीमती अर्चना पोर्ते, राष्ट्रीय समन्वयक, ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस एवं प्रभारी, मध्य प्रदेश आदिवासी कांग्रेस, तथा रामू टेकाम, प्रदेश अध्यक्ष, मध्य प्रदेश आदिवासी कांग्रेस भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।महिलाओं की चूल्हा बंदी: त्योहारों पर भी नहीं जले चूल्हे चिता आंदोलन के बीच महिलाओं की चूल्हा बंदी ने संघर्ष को एक भावनात्मक और गंभीर मोड़ दे दिया है। आंदोलन से जुड़ी महिलाओं के अनुसार, कई दिनों से उनके घरों में चूल्हे नहीं जले हैं। कुछ महिलाओं ने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों से उन्होंने खाना तक नहीं बनाया।महिलाओं का कहना है कि उनके जीवन में यह पहली बार हुआ है कि नवरात्रि और दशहरे जैसे त्योहारों पर, जब घरों में पकवान बनते थे और खुशियां मनाई जाती थीं, तब उनके घरों में चूल्हे तक नहीं जले।महिलाएं इसके लिए सरकार और पुलिस-प्रशासन की निष्क्रियता को जिम्मेदार ठहरा रही हैं। उनका कहना है कि जब अमित भटनागर 26 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं और उनकी जान को खतरा होने की आशंका है, तब भी प्रशासन की ओर से समाधान की दिशा में प्रभावी पहल नहीं की जा रही है।महिलाओं ने दिव्या अहिरवार का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि एक दलित-आदिवासी समुदाय की युवती को कथित झूठे मुकदमे में जेल भेजे जाने से गरीब और वंचित परिवारों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ी है। आंदोलनकारी दिव्या के मामले में निष्पक्ष न्याय और उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं।24 अक्टूबर को पन्ना पहुंचेंगे उमंग सिंघार, विस्थापितों से करेंगे मुलाकात नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से जारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार, वे 24 अक्टूबर को पन्ना पहुंचेंगे और केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित अन्य परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापितों से मुलाकात करेंगे।इस दौरान आदिवासी-किसान परिवारों के विस्थापन, मुआवजे, पुनर्वास और उनके अधिकारों से जुड़े सवाल प्रमुखता से उठने की उम्मीद है।कार्यक्रम में डॉ. विक्रांत भूरिया, विधायक झाबुआ एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस; श्रीमती अर्चना पोर्ते, राष्ट्रीय समन्वयक, ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस एवं प्रभारी, मध्य प्रदेश आदिवासी कांग्रेस; तथा रामू टेकाम, प्रदेश अध्यक्ष, मध्य प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के भी शामिल होने का कार्यक्रम तय होने की जानकारी दी गई है।इन नेताओं की भागीदारी से चिता आंदोलन और प्रभावित परिवारों के मुद्दों को व्यापक राजनीतिक एवं सामाजिक मंच मिलने की संभावना है।रैपुरा से केन-बेतवा तक: अधिकारों की लड़ाई को लेकर एकजुट होंगे लोगजय किसान संगठन के अनुसार, रैली का उद्देश्य पन्ना जिले में आदिवासी-किसानों के साथ कथित अन्याय, वन अधिकारों, विस्थापन और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े मामलों पर जनआवाज बुलंद करना है।रैपुरा में आदिवासियों के साथ कथित दुर्व्यवहार, केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय, रूँझ और पुरुषोत्तम नगर सहित विभिन्न क्षेत्रों में वर्षों से रह रहे आदिवासी-किसान परिवारों के घर तोड़े जाने और विस्थापन से जुड़े मामलों को लेकर न्याय की मांग उठाई जाएगी।रैली के माध्यम से चिता आंदोलन की मांगों को स्वीकार करने, प्रभावित परिवारों को कानून के अनुसार मुआवजा और पुनर्वास देने, कथित फर्जी मुकदमों की निष्पक्ष जांच कराने तथा जेल में बंद आंदोलनकारियों के मामलों की समीक्षा करने की मांग की जाएगी।रैली के समापन पर जिला प्रशासन को महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। साथ ही अमित भटनागर से उनके गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए आमरण अनशन समाप्त करने की अपील भी की जाएगी, ताकि उनके स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए आंदोलन की मांगों के समाधान के लिए आगे की पहल हो सके।संयुक्त किसान मोर्चा और जन आंदोलनों का समर्थन अमित भटनागर के गिरते स्वास्थ्य और चिता आंदोलन के 41 दिन बाद भी समाधान नहीं निकलने को लेकर जन समन्वय संघर्ष समिति और संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन को समर्थन दिया है। संगठनों ने प्रदेश और देशभर के किसान आंदोलनों तथा जन आंदोलनों से जुड़े साथियों से पन्ना पहुंचने की अपील की है।जन संघर्ष मोर्चा के विजय कुमार और फाग राम ने शासन-प्रशासन से तत्काल संवाद शुरू करने, आमरण अनशन समाप्त कराने के लिए सार्थक पहल करने और आंदोलनकारियों पर दर्ज कथित फर्जी मुकदमों की निष्पक्ष समीक्षा करने की मांग की है।उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो देशभर के आंदोलनकारी पन्ना पहुंचेंगे। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाले हालात की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।संविधान, लोकतंत्र और जल-जंगल-जमीन के सवाल पर संघर्ष चिता आंदोलन के समर्थकों का कहना है कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति या दल के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी-किसान परिवारों के अधिकारों, सम्मानजनक पुनर्वास, कानून के पालन और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार की रक्षा से जुड़ा है।आंदोलनकारियों की मांग है कि सरकार प्रभावित परिवारों की समस्याओं पर तत्काल संवाद करे, उनके कानूनी अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे और दर्ज मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कराए।

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